पश्चिम बंगाल में 25753 शिक्षकों की नियुक्ति को सुप्रीम कोर्ट ने किया रद्द, कोलकाता हाईकोर्ट का फैसला बरकरार

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार को एक बड़ा झटका देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कलकत्ता हाई कोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें राज्य के सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में 25,753 शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति को अमान्य घोषित किया गया था। अदालत ने पूरी चयन प्रक्रिया को ‘दूषित और दागदार’ बताते हुए कहा कि इसे सुधारा नहीं जा सकता। मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति संजय कुमार की पीठ ने स्पष्ट रूप से कहा कि चयन प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर हेरफेर और धोखाधड़ी हुई है, जिसके कारण यह पूरी तरह से अविश्वसनीय हो गई है। मुख्य न्यायाधीश खन्ना ने फैसला सुनाते हुए कहा, “चयन की विश्वसनीयता और वैधता खत्म हो गई है। हमने उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए निर्देशों में कुछ संशोधन किया है। अदालत ने उच्च न्यायालय के उस निर्देश पर हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, जिसमें दागी उम्मीदवारों को नौकरी से हटाने और उन्हें प्राप्त वेतन वापस करने का आदेश दिया गया था। सीजेआई ने कहा कि चूंकि नियुक्तियां धोखाधड़ी के आधार पर की गई थीं, इसलिए अदालत उच्च न्यायालय के इस निर्देश को बदलने का कोई औचित्य नहीं देखती है। उन्होंने विशेष रूप से कहा, “जिन उम्मीदवारों को दागी पाया गया है, उनके लिए पूरी चयन प्रक्रिया को सही ढंग से शून्य और अमान्य घोषित किया गया है। मामले में विस्तृत निर्णय बाद में जारी किया जाएगा। यह फैसला कलकत्ता उच्च न्यायालय के 22 अप्रैल, 2024 के उस फैसले के खिलाफ दायर याचिकाओं पर आया है, जिसमें पश्चिम बंगाल के सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में 25,753 शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति को अमान्य घोषित किया गया था। यह मामला 2016 में पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग (SSC) द्वारा आयोजित भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है। 24,640 पदों के लिए 23 लाख उम्मीदवार परीक्षा में शामिल हुए थे, जिनमें से 25,753 को नियुक्ति पत्र जारी किए गए थे। अनियमितताओं के आरोपों में ओएमआर शीट में छेड़छाड़ और रैंक में हेरफेर शामिल हैं। कलकत्ता उच्च न्यायालय ने इन अनियमितताओं को गंभीरता से लेते हुए नियुक्तियों को रद्द कर दिया था। इसके बाद, पश्चिम बंगाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल 19 दिसंबर को मामले की अंतिम सुनवाई शुरू की थी। 15 जनवरी, 27 और 10 फरवरी को भी सुनवाई हुई, जिसके बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। पिछले साल मई में, सुप्रीम कोर्ट ने राज्य के स्कूल सेवा आयोग (SSC) द्वारा की गई नियुक्तियों पर उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक लगा दी थी। हालांकि, अदालत ने सीबीआई को मामले में अपनी जांच जारी रखने की अनुमति दी थी।
