पटना में प्रचंड गर्मी का अलर्ट जारी, अचानक तेजी से बढ़ा तापमान, लोगों को सतर्क रहने की सलाह

पटना। बिहार में इस साल गर्मी ने समय से पहले ही अपना प्रकोप दिखाना शुरू कर दिया है। मार्च के अंत में ही तापमान में तेजी से वृद्धि देखी जा रही है, जिससे आने वाले दिनों में गर्मी की तीव्रता और अधिक बढ़ने की संभावना है। मौसम विभाग ने आगामी दो-तीन दिनों में तापमान में और अधिक वृद्धि होने का पूर्वानुमान जताया है। इस कारण राज्य के विभिन्न हिस्सों में लू चलने की भी संभावना बनी हुई है।
बढ़ता तापमान और संभावित प्रभाव
पिछले कुछ वर्षों से बिहार में गर्मी का स्वरूप बदला है। पहले मार्च और अप्रैल के दौरान कभी-कभी हल्की बारिश से गर्मी का असर कम हो जाता था, लेकिन अब इस अवधि में तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अप्रैल और मई में बारिश नहीं हुई, तो इस बार गर्मी के कई पुराने रिकॉर्ड टूट सकते हैं। इससे न केवल मानव जीवन बल्कि कृषि, जल संसाधन और पर्यावरण पर भी गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। अप्रैल से जून के बीच अधिकतम तापमान लगातार 40 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक बना रहने की संभावना है, जिससे खेती-किसानी पर भी विपरीत असर पड़ेगा।
भूजल स्तर पर संकट के बादल
गर्मी का सीधा प्रभाव भूजल स्तर पर भी पड़ेगा। वर्तमान में पटना जिले का भूजल स्तर लगभग 30 फीट पर है, लेकिन अगर तापमान इसी तरह बढ़ता रहा, तो अगले पंद्रह दिनों में भूजल स्तर और नीचे जा सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि भूजल स्तर 40 फीट से नीचे चला जाता है, तो पटना समेत अन्य जिलों में जल संकट गहरा सकता है। पीएचईडी (लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग) के अधिकारियों का कहना है कि अभी स्थिति सामान्य है, लेकिन यदि लगातार तापमान बढ़ता रहा, तो आने वाले दिनों में पानी की किल्लत का सामना करना पड़ सकता है।
स्वास्थ्य पर बढ़ता खतरा
तेजी से बढ़ती गर्मी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को भी जन्म दे रही है। मौसम में अचानक बदलाव के कारण हृदय, फेफड़े और किडनी से जुड़ी समस्याएं बढ़ सकती हैं। डॉक्टरों के अनुसार, पहले से ही हृदय रोग, अस्थमा और किडनी की बीमारी से पीड़ित लोगों को अधिक सतर्क रहने की जरूरत है। अस्पतालों में नाक से खून बहने, सर्दी-खांसी, एलर्जी, बुखार, सिर दर्द और थकान जैसी समस्याओं के मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। गर्मी के कारण शरीर में पानी की कमी हो सकती है, जिससे डिहाइड्रेशन और हीट स्ट्रोक जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। बच्चों और बुजुर्गों को विशेष रूप से इस मौसम में अधिक सावधानी बरतने की आवश्यकता है।
गर्मी से बचाव के उपाय
चूंकि गर्मी का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है, इसलिए सतर्कता और बचाव के उपाय अपनाना बेहद जरूरी है। विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार शरीर में पानी की कमी न होने दें और ओआरएस या नींबू पानी का सेवन करें। दोपहर 12 से 3 बजे के बीच घर से बाहर निकलने से बचें। तंग और गहरे रंग के कपड़ों की बजाय हल्के और ढीले कपड़े पहनें। अधिक तली-भुनी चीजें खाने से बचें और फल-सब्जियों का सेवन करें। यदि चक्कर, कमजोरी या सिर दर्द महसूस हो, तो तुरंत चिकित्सक से परामर्श लें।
आने वाले महीनों की चुनौती
मौसम विभाग के अनुसार, बिहार में मानसून 13 से 15 जून के बीच आने की संभावना है। यदि जून से पहले प्री-मानसून बारिश नहीं हुई, तो गर्मी का प्रकोप अगले तीन महीनों तक जारी रहेगा। ऐसे में जल संकट, स्वास्थ्य समस्याएं और अन्य परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। पटना और बिहार के अन्य हिस्सों में इस बार गर्मी का असर समय से पहले दिखने लगा है। तापमान में वृद्धि से न केवल मानव स्वास्थ्य बल्कि जल स्तर और कृषि पर भी बुरा असर पड़ सकता है। मौसम विशेषज्ञों की मानें तो अगले कुछ महीनों तक गर्मी का यह तीव्र रूप बना रहेगा। ऐसे में लोगों को सतर्क रहने, पानी का अधिक सेवन करने और गर्मी से बचाव के उपाय अपनाने की सख्त जरूरत है।
