नई पोस्टिंग पॉलिसी में आवेदन नहीं करने वाले शिक्षकों को अपने हिसाब से विद्यालय देगी बिहार सरकार, आदेश जारी

पटना। बिहार सरकार ने सरकारी स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों के स्थानांतरण के लिए नई पोस्टिंग नीति जारी की है। इस नीति के अनुसार, शिक्षकों को अपने पसंदीदा स्थान पर पोस्टिंग पाने के लिए 7 से 21 नवंबर तक ऑनलाइन आवेदन कर अपना विकल्प चुनना अनिवार्य होगा। जो शिक्षक अपने पसंदीदा स्थान का विकल्प चुनने में असफल रहेंगे, उन्हें सरकार की ओर से स्वचालित रूप से किसी अन्य विद्यालय में पोस्टिंग दी जाएगी। यह नीति विशेष रूप से सक्षमता परीक्षा पास कर चुके नियोजित शिक्षकों पर लागू होगी। बिहार सरकार ने यह कदम शिक्षकों की उचित तैनाती और प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत बनाने के उद्देश्य से उठाया है। शिक्षकों के तबादले के लिए शिक्षा विभाग ने स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं ताकि हर शिक्षक को समान अवसर मिले और उनकी तैनाती में पारदर्शिता बनी रहे। इसके तहत शिक्षकों को गृह जिला को आधार बनाकर विभिन्न जिलों में उनकी तैनाती का प्रावधान किया गया है।
ऑनलाइन विकल्प की आवश्यकता
नियोजित शिक्षकों को अपना विकल्प ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से जमा करना अनिवार्य है। यह विकल्प शिक्षक की पसंद के विद्यालय से संबंधित होगा। यदि कोई शिक्षक यह विकल्प नहीं भरता है, तो उस शिक्षक की मौजूदा पोस्टिंग वाली जगह को उनका गृह जिला मान लिया जाएगा और उन्हें सरकार द्वारा अन्य किसी विद्यालय में स्थानांतरित कर दिया जाएगा।
स्थानांतरण में विकल्प देने का अनिवार्य नियम
सक्षमता परीक्षा पास कर चुके शिक्षकों को ऑनलाइन पोर्टल पर अपना लॉगिन बनाकर स्थानांतरण के लिए विकल्प चुनना अनिवार्य है। अन्यथा, उनकी पोस्टिंग सरकार द्वारा बिना किसी पूर्व सूचना के अन्य विद्यालय में कर दी जाएगी। यह प्रावधान शिक्षकों की तैनाती को संतुलित और सुव्यवस्थित बनाने के लिए किया गया है ताकि राज्य के सभी क्षेत्रों में शिक्षकों की पर्याप्त संख्या हो सके।
संबंधित प्रमाण पत्रों की आवश्यकता
यदि किसी शिक्षक को विशेष परिस्थिति के तहत स्थानांतरण की आवश्यकता है, जैसे कि गंभीर बीमारी, असाध्य रोग, या दिव्यांगता, तो उन्हें संबंधित सर्टिफिकेट पोर्टल पर अपलोड करना होगा। सभी प्रमाण पत्र सिविल सर्जन कार्यालय द्वारा प्रमाणित होने चाहिए, ताकि उनके स्थानांतरण की मांग का औचित्य सिद्ध हो सके।
पति-पत्नी के मामले में विशेष प्रावधान
यदि एक ही परिवार में पति-पत्नी दोनों सरकारी स्कूलों में शिक्षक के पद पर कार्यरत हैं, या उनमें से कोई अन्य सरकारी कर्मी है, तो ऐसे मामलों में स्थानांतरण के लिए गृह जिले की जानकारी पोर्टल पर देनी होगी। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि परिवार के सदस्य एक ही जिले या आस-पास के स्थानों पर रह सकें, जिससे पारिवारिक दायित्वों का निर्वहन आसान हो। यह पॉलिसी शिक्षकों की तैनाती में संतुलन लाने के लिए है। साथ ही, सरकार चाहती है कि दूरदराज के इलाकों में भी शिक्षकों की पर्याप्त संख्या उपलब्ध हो, ताकि सभी छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।
कैसे करेगी यह नीति शिक्षकों के लिए काम
शिक्षा विभाग ने यह स्पष्ट किया है कि यह पॉलिसी बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) से चयनित शिक्षकों और पुराने नियमित शिक्षकों के लिए थोड़ी अलग होगी। ई-शिक्षा कोष पोर्टल पर इन्हें पूछा जाएगा कि क्या वे स्थानांतरण चाहते हैं। यदि कोई शिक्षक स्थानांतरण नहीं चाहता है, तो उनसे कोई जानकारी नहीं मांगी जाएगी। स्थानांतरण के लिए सहमति देने पर ही यह पोर्टल उनके लिए स्थानांतरण प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगा।
गैर-विकल्प देने पर स्वत: स्थानांतरण का निर्णय
यदि कोई शिक्षक विकल्प नहीं भरता है तो उनके वर्तमान पदस्थापन को गृह जिला मानकर पूरे बिहार में कहीं भी उनकी पोस्टिंग कर दी जाएगी। इस प्रावधान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी शिक्षक अपने पसंदीदा स्थान के चयन में रुचि दिखाए, ताकि उनकी मनोवांछित पोस्टिंग सुनिश्चित हो सके। इस नियम के पीछे राज्य सरकार का मुख्य उद्देश्य यह है कि दूरस्थ और कम सुविधाओं वाले स्कूलों में भी योग्य शिक्षकों की तैनाती की जा सके और राज्य के शिक्षा स्तर में सुधार लाया जा सके। बिहार सरकार की यह नई पोस्टिंग नीति शिक्षकों को यह अवसर देगी कि वे अपने पसंदीदा स्थानों पर पोस्टिंग के लिए आवेदन करें। इस पॉलिसी के माध्यम से सरकार एक ओर शिक्षकों की आवश्यकताओं का सम्मान कर रही है, तो दूसरी ओर उन्हें यह भी सुनिश्चित करना है कि राज्य के दूरदराज और पिछड़े इलाकों में भी शिक्षकों की पर्याप्त संख्या हो। बिहार के शिक्षा विभाग द्वारा लाए गए इस नीति के माध्यम से एक स्पष्ट संदेश दिया जा रहा है कि राज्य सरकार शिक्षा व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए तत्पर है।
