चैती छठ में अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य आज, पटना में 41 गंगा घाट और 7 तालाब तैयार, सीसीटीवी से निगरानी

पटना। चैती छठ का आज तीसरा दिन है। लोक आस्था के महापर्व के तीसरे दिन अस्ताचलगामी (डूबते हुए) सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। कल यानि 4 अप्रैल को उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही 4 दिन का महापर्व खत्म होगा। पूजा के लिए शहर में 41 गंगा घाट और 7 तालाबों को तैयार किया गया है। व्रतियों-श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए घाट के पास पेयजल, बैरिकेडिंग, लाइटिंग, चेंजिंग रूम, हेल्प डेस्क और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं। मॉनिटरिंग के लिए सीसीटीवी कैमरे से लगाए गए हैं। छठ महापर्व को लेकर पटना में ट्रैफिक रूट में बदलाव किए गए हैं। 60 पॉइंट्स पर 125 ट्रैफिक पुलिस पदाधिकारियों को लगाया गया है। साथ ही 300 से अधिक पुलिसकर्मी की तैनाती की गई है। 3 अप्रैल को 02:00 बजे दोपहर से शाम 05:30 बजे तक एवं 4 अप्रैल को शाम 3 बजे से 6 बजे तक दीघा मोड़ से आशियाना मोड़ की तरफ (उत्तर से दक्षिण की ओर) वाहनों का परिचालन नहीं होगा। इस दौरान सभी वाहन रामजीचक मोड़ से नहर रोड होते हुए (बेली रोड) जा सकेंगी। छठ मुख्य रूप से भगवान भास्कर की उपासना का पर्व है। आज रोहिणी नक्षत्र और आयुष्मान योग में अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। कल शुक्रवार को चैत्र शुक्ल सप्तमी में उदीयमान सूर्य को मृगशिरा नक्षत्र, शोभन योग और रवियोग के सुयोग में अर्घ्य देकर व्रती इस महापर्व को पूर्ण करेंगी। भगवान भास्कर को जल से अर्घ्य देने से मानसिक शांति और जीवन में उन्नति होती हैI लाल चंदन, फूल के साथ अर्घ्य से यश की प्राप्ति होती है। कलयुग के प्रत्यक्ष देवता सूर्य को जल में गुड़ मिलाकर अर्घ्य देने से पुत्र और सौभाग्य का वरदान मिलता है। महालक्ष्मी की प्राप्ति के लिए सूर्य को दूध का अर्घ्य देना चाहिए। भगवान भास्कर को अर्घ्य देने से कई जन्मों के पाप नष्ट होते हैं। देवताओ में सूर्य ऐसे देवता हैं जिनको प्रत्यक्ष देखा जा सकता है। सूर्य की शक्ति का मुख्य स्त्रोत उनकी पत्नी उषा और प्रत्युषा हैI छठ में सूर्य के साथ दोनों शक्तियों की संयुक्त आराधना होती है। षष्ठी देवी भगवान सूर्य की मानस बहन हैं। इसलिए भगवान भास्कर के साथ उनकी बहन षष्ठी देवी की पूजा होती है। प्रकृति के षष्टम अंश से षष्ठी माता उत्पन्न हुई है। बच्चों के जन्म के छठे दिन षष्ठी मइया की पूजा की जाती है। ताकि बच्चे दीर्घायु और निरोग रहे। षष्ठी देवी को देवसेना भी कहा गया है। अर्घ्य पात्र सूर्य उपासना के महापर्व में भगवान भास्कर को पीतल के पात्र से दूध और तांबे के पात्र से अर्घ्य देने से अभीष्ट फल की प्राप्ति होती है। चांदी, स्टील, शीशा और प्लास्टिक के पात्र से सूर्य को अर्घ्य नहीं देना चाहिए।

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