भूमि सर्वेक्षण में अब सभी कागजात जमा करना अनिवार्य नहीं, जो उपलब्ध हो उसी से सर्वे होगा

पटना। बिहार सरकार ने राज्य में चल रहे भूमि सर्वेक्षण को लेकर आम जनता को एक बड़ी राहत दी है। राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री संजय सरावगी ने स्पष्ट किया है कि अब सर्वेक्षण के लिए सभी कागजात देना अनिवार्य नहीं है। इसके बजाय जमीन से जुड़े जितने दस्तावेज लोगों के पास उपलब्ध हैं, उतने ही देकर सर्वेक्षण की प्रक्रिया पूरी कराई जा सकती है।
स्वघोषणा के साथ आंशिक कागजात की सुविधा
मंत्री संजय सरावगी ने बताया कि जिन लोगों के पास जमीन से जुड़े कम दस्तावेज हैं, वे भी स्वघोषणा पत्र के साथ आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों विकल्प मौजूद हैं। यह निर्णय उन लोगों के लिए खास तौर पर फायदेमंद होगा जो विभिन्न कारणों से अपने सभी दस्तावेज एक साथ उपलब्ध नहीं करा पा रहे हैं। मंत्री ने लोगों से अपील की है कि जैसे-जैसे दस्तावेज उपलब्ध हों, वे उन्हें पोर्टल पर अपलोड करते रहें।
समय सीमा और पोर्टल की उपलब्धता
हालांकि, मंत्री ने यह स्पष्ट नहीं किया कि यह सुविधा कितने समय तक जारी रहेगी। लेकिन उन्होंने यह जरूर कहा कि जिनका सर्वे किसी कारणवश अब तक नहीं हो पाया है, वे पोर्टल खुले रहने तक अपने दस्तावेज अपलोड कर सकते हैं। यह भी चर्चा में है कि 31 मार्च की निर्धारित समय सीमा को कुछ और दिनों के लिए बढ़ाया जा सकता है, जिससे अधिक से अधिक लोग इस सुविधा का लाभ उठा सकें।
2026 तक सर्वेक्षण पूरा करने का लक्ष्य
बिहार सरकार ने राज्य के 45,000 से अधिक गांवों में भूमि सर्वेक्षण का काम 20 अगस्त से शुरू किया है। इसका उद्देश्य राज्य में जमीन के मालिकाना हक और उसकी स्थिति को स्पष्ट करना है। सरकार ने इस महत्त्वपूर्ण अभियान को दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य तय किया है। सर्वेक्षण के दौरान न केवल जमीन की माप-जोख होगी, बल्कि उस पर बने मकानों और अन्य निर्माणों की भी जानकारी एकत्र की जाएगी।
कम प्रदर्शन करने वाले जिलों पर सख्ती
मंत्री ने यह भी जानकारी दी कि कुछ जिलों में स्वघोषणा की संख्या बेहद कम है, जिससे वे असंतुष्ट हैं। पूर्वी और पश्चिमी चंपारण के 10 अंचल इस मामले में सबसे पीछे हैं। सरकार ने चेतावनी दी है कि यदि अगले 15 दिनों में इन अंचलों का प्रदर्शन नहीं सुधरा, तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
जनता के लिए बड़ी सहूलियत
सरकार का यह कदम आम जनता के लिए एक बड़ी सहूलियत लेकर आया है। अब लोगों को सभी दस्तावेज जुटाने की चिंता किए बिना अपने उपलब्ध कागजात के आधार पर सर्वेक्षण कराने का मौका मिल रहा है। इससे सर्वेक्षण की प्रक्रिया तेज होगी और राज्य में जमीन के रिकॉर्ड को पारदर्शी व सही ढंग से तैयार किया जा सकेगा।
