सरकारी स्कूलों के बच्चों को अप्रैल में मिलेगी पोशाक की राशि, 710 करोड रुपए की मिली मंजूरी

पटना। राज्य सरकार ने घोषणा की है कि शैक्षणिक सत्र 2025-26 में विद्यार्थियों को उनके पोशाक की राशि सत्र की शुरुआत में ही, यानी अप्रैल माह में, उपलब्ध करा दी जाएगी। इस योजना को लागू करने के लिए सरकार ने 710 करोड़ रुपये की मंजूरी दे दी है। यह निर्णय इसलिए लिया गया है ताकि विद्यार्थियों को समय पर पोशाक खरीदने में सुविधा हो और वे नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत से ही स्कूल की निर्धारित वर्दी पहनकर स्कूल आ सकें। इससे बच्चों को आत्मविश्वास मिलेगा और उनमें स्कूल के प्रति अनुशासन भी बना रहेगा। खासकर उन परिवारों को राहत मिलेगी, जिनकी आर्थिक स्थिति कमजोर है और बच्चों के लिए समय पर पोशाक खरीद पाना उनके लिए कठिन होता है। इस योजना के तहत, उन सभी बच्चों को पोशाक की राशि दी जाएगी, जो पहली बार स्कूल में दाखिला लेंगे। यानी, पहली कक्षा में प्रवेश लेने वाले सभी विद्यार्थी इस योजना का लाभ उठा सकेंगे। इसके अलावा, जो बच्चे पहले से सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे हैं, उन्हें पोशाक की राशि उनकी पिछली कक्षा में दर्ज उपस्थिति के आधार पर दी जाएगी। यदि किसी विद्यार्थी की उपस्थिति पर्याप्त नहीं होगी, तो उसे इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा। इसका उद्देश्य बच्चों और उनके अभिभावकों को नियमित रूप से स्कूल भेजने के लिए प्रोत्साहित करना भी है। सरकार द्वारा दी जाने वाली पोशाक राशि सीधे बच्चों या उनके अभिभावकों के बैंक खाते में भेजी जाएगी। इससे पारदर्शिता बनी रहेगी और किसी भी तरह की गड़बड़ी की संभावना कम हो जाएगी। यह योजना सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले उन बच्चों के लिए विशेष रूप से लाभकारी होगी, जिनके परिवार आर्थिक रूप से कमजोर हैं और बच्चों को पढ़ाई के लिए जरूरी चीजें उपलब्ध कराना उनके लिए मुश्किल होता है। राज्य सरकार का यह कदम शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने और सरकारी स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति में सुधार लाने की दिशा में एक सकारात्मक प्रयास है। इससे बच्चों में स्कूल जाने की रुचि बढ़ेगी, और वे पढ़ाई के प्रति अधिक गंभीर होंगे। साथ ही, माता-पिता भी बच्चों की शिक्षा को लेकर अधिक जिम्मेदारी महसूस करेंगे। इस योजना के तहत खर्च होने वाली 710 करोड़ रुपये की राशि शिक्षा विभाग के बजट से दी जाएगी। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि आगे भी शिक्षा से जुड़ी योजनाओं को प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि राज्य में शैक्षणिक स्तर को बेहतर बनाया जा सके।

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