सम्राट चौधरी का बड़ा ऐलान, कहा- राज्य में 350 नए कॉलेज खुलेंगे, छात्रों को नहीं जाना पड़ेगा बाहर

पटना। पटना में आयोजित रामचंद्र खान सामाजिक विज्ञान पुरस्कार समारोह के दौरान बिहार के डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने राज्य के शैक्षणिक विकास को लेकर कई बड़े ऐलान किए। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का लक्ष्य है कि राज्य के युवाओं को उच्च शिक्षा के लिए राज्य से बाहर न जाना पड़े।
राज्य में खुलेंगे 350 नए डिग्री कॉलेज
अपने संबोधन में सम्राट चौधरी ने बताया कि बिहार के 350 प्रखंड ऐसे हैं जहां अब तक डिग्री कॉलेज नहीं हैं। इस कमी को दूर करने के लिए सरकार ने हर ऐसे प्रखंड में डिग्री कॉलेज खोलने का निर्णय लिया है। इससे राज्य के छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए अन्य राज्यों की ओर पलायन नहीं करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि बिहार के पास प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, लेकिन संसाधनों की उपलब्धता अभी भी चुनौती बनी हुई है।
इंफ्रास्ट्रक्चर को मिल रहा नया रूप
सम्राट चौधरी ने यह भी बताया कि राज्य में इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर करने की दिशा में कई प्रयास किए जा रहे हैं। पहले रोडवेज के विस्तार पर काम शुरू हुआ था, अब एयर ट्रैफिक को भी मजबूती दी जा रही है। उन्होंने बताया कि बिहार में 10 एयरपोर्ट बनाए जाने की योजना है, जिनमें से सात की स्वीकृति केंद्र सरकार से मिल चुकी है। बाकी तीन एयरपोर्ट छोटे स्तर के होंगे।
भागलपुर को मिलेगा सेंट्रल यूनिवर्सिटी का दर्जा
उन्होंने कहा कि भागलपुर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विक्रमशिला को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा देने की घोषणा की है। इसके लिए 200 एकड़ से ज्यादा भूमि का अधिग्रहण शुरू हो चुका है। यह कदम बिहार की उच्च शिक्षा को एक नई दिशा देगा।
नालंदा और विक्रमशिला का गौरव लौटेगा
डिप्टी सीएम ने बिहार के ऐतिहासिक शैक्षणिक गौरव का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि नालंदा, विक्रमशिला और तक्षशिला जैसे विश्वविद्यालय प्राचीन काल में दुनिया को शिक्षा देने वाले केंद्र थे। आज फिर से नालंदा यूनिवर्सिटी की स्थापना के साथ उस गौरव को दोबारा स्थापित किया जा रहा है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि 19 जून 2023 को प्रधानमंत्री ने नालंदा विश्वविद्यालय के ऐतिहासिक महत्व को फिर से मान्यता दी थी।
पलायन को रोकने की दिशा में प्रयास
उन्होंने कोटा का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां पढ़ने वाले अधिकांश छात्र और पढ़ाने वाले शिक्षक भी बिहार के ही होते हैं। इसका मतलब यह है कि बिहार में क्षमता और गुणवत्ता तो है, परंतु संसाधनों की कमी है। इसलिए सरकार अब शिक्षा के क्षेत्र में बड़े बदलाव के लिए प्रतिबद्ध है।
रामचंद्र खान को श्रद्धांजलि
समारोह के अंत में सम्राट चौधरी ने रामचंद्र खान को एक सख्त प्रशासक और समाजसेवी के रूप में याद किया। उन्होंने कहा कि वे जिस इलाके से आते हैं, वहां रामचंद्र खान की पहचान एक ईमानदार और प्रभावशाली अधिकारी के रूप में रही है। कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद मनोज झा भी उपस्थित रहे। यह घोषणाएं बिहार को शिक्षा और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में आगे बढ़ाने की दिशा में एक मजबूत कदम मानी जा रही हैं।
